प्रशासनिक प्रतिवेदन वर्ष 2009-10
मध्यप्रदेश शासन
पशुपालन विभाग
पद नाम नाम दूरभाष
कार्यालय निवास
मंत्रालय
मंत्री मान. श्री अजय विश्नोई 2441377 2441081 2430011
अपर मुख्य सचिव एंव कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के.राय 2441048 2430413
प्रमुख सचिव श्री मनोज गोयल 2760262 2460056
उप सचिव श्री एल0एन0सोनी 4251085 -
अवर सचिव श्री जी0डी0गुप्ता 2512171 -
पदेन अवर सचिव डा0 आर0के0 शर्मा 2573904 2573904
विभागाध्यक्ष
संचालक पशु चिकित्सा सेवायें डा0 आर0के0रोकड़े 2772262 2765340
प्रबन्ध संचालक म.प्र.सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित प्रबन्ध संचालक म.प्र.सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित 2602145 2460169
प्रबन्ध संचालक म.प्र.पशुधन एंव कुक्कुट विकास निगम डा0 बी0एन0 सिंह 2776086 2759835
प्रबन्ध संचालक म.प्र.गौ पालन एंव पशुधन संवर्धन बोर्ड डा0 आर0के0रोकड़े 2776310 2765340
संचालनालय, पशु चिकित्सा सेवायें
संयुक्त संचालक डा0 आर0के0 दिलावरे 2772061
संयुक्त संचालक डा0 आर0के0मेहिया 2773315
सागर जिले में ऐतिहासिक पशु रहस मेला गढ़ाकोटा में दुधारु पशु बीमा योजना का शुभारंभ करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान मध्यप्रदेश शासन
सूचना प्रबन्धन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु सेमिनार के शुभारम्भ पर माननीय मंत्री पशुपालन डा0 अजय विश्नोई द्वीप प्रज्वलित करते हुए
विभागीय व्यवसाइड का शुभारंभ करते हुए माननीय मंत्री पशुपालन डा0 अजय विश्नोई
सूचना प्रबन्धन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु सेमिनार के दौरान उद्बोधन देते हुए माननीय मंत्री पशुपालन डा0 अजय विश्नोई
विषय सूची
अध्याय विषय पृष्ठ
एक 1
1.1 तकनीकी कार्य
1.2 विभाग के अन्तर्गत आने वाले उपक्रम/ निगम मण्डलों का विवरण 1
1.3 अधीनस्थ संस्थाएं 1-2
1.4 विभाग द्वारा प्रसारित नियम तथा अधिनियम 2
1.5 विभाग का दायित्व 3
1.6 विभाग की सामान्य जानकारी 3
दो पशुपालन-विकास की दृष्टि से 4
2.1 महत्वपूर्ण सांख्यिकी 4
2.2 मध्यप्रदेश में पशुधन विकास 4-6
तीन पशुपालन विभाग-उद्देश्य व रणनीति 7
3.1 विभाग का उद्देश्य 7
3.2 उद्देश्यों की पूर्ति हेतु रणनीति 7
3.3 पशु स्वास्थ्य रक्षा 7-8
3.4 नस्ल सुधार ;गौ-भैंसवंशीय पशु प्रजनन परियोजनाद्ध 8-11
3.5 हितग्राही मूलक योजनाएं 11-15
3.6 पशु कल्याण समिति 16
 3.7 आसरा 16
3.8 केन्द्रीय प्रवर्तित योजनाएं 17-18
3.9 केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना 18-20
3.10 अन्य योजनाएं-म0प्र0वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट,दुधारु पशु बीमा योजना 20-22
3.11 विभागीय नियुक्तियां एंव पदोन्नतियां 22
3.12 विभागीय जांच 23
3.13 न्यायालयीन प्रकरणों की स्थिति 23
3.14 स्थानान्तरण 24
चार बजट 25
4.1 आयोजनेत्तर बजट एंव व्यय 26
4.2 आयोजना बजट एंव व्यय 26-29
4.3 आयोजना 30
पाॅंच उपलब्धि 31
5.1 विभिन्न योजनान्तर्गत वर्षवार प्रगति 31-38
छः सामान्य प्रशासनिक जानकारी 39
6.1 सिटीजन चार्टर 40
सात 7.1 म.प्र. राज्य पशुधन एंव कुक्कुट विकास निगम 41
7.2 एम.पी.स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड 42-43
7.3 म.प्र. गौपालन एंव पशुधन संवर्धन बोर्ड 44-45
परिशिष्ठ-एक 18वीं पशु संगणना की (त्वरित)जिलेवार पशुधन स्थिति 46-47
परिशिष्ठ-दो- जिलेवार अनुमानित दूध,अण्डा,मंास की प्रगति 48-49
परिशिष्ठ-तीन प्रजनन योग्य गौ-भैंस की जानकारी 50-51
परिशिष्ठ-चार म.प्र में पशु चिकित्सा संस्थावार पशुधन की स्थिति 52-53
परिशिष्ठ-पाॅंच हितग्राही मूलक कार्यक्रम के अन्तर्गत विगत तीन वर्षों की वित्तीय उपलब्धि 54-55
परिशिष्ठ-छः हितग्राही मूलक कार्यक्रम के अन्तर्गत विगत तीन वर्षों की भौतिक उपलब्धि 56


अध्याय -एक
1.1 तकनीकी कार्य
1.1.1 पशु चिकित्सा सेवायें अन्तर्गत पशु रोगों की रोकथाम तथा उसका उपचार,
1.1.2 पशु रोग अन्वेषण,
1.1.3 पशु रोग टीका उत्पादन,
1.1.4 पशु कल्याण,
1.1.5 पशुपालन अन्तर्गत समग्र पशुधन का संरक्षण/संवर्धन एंव विकास,
1.1.6 समुन्नत प्रजनन,
1.1.7 पशुपालन विस्तार सेवा,
1.1.8 पशुधन कार्य का पर्यवेक्षण,
1.1.9 कुक्कुट पालन, प्रजनन संवर्धन,
1.1.10 दुग्ध, दुग्ध उत्पादों, अण्डों, मंास की जांच गुणवत्ता नियंत्रण,
1.1.11 डेयरी गतिविधियों का सर्वेक्षण, विस्तार, विकास साॅंख्यिकी,
1.1.12 सेवाओं से संबद्ध सभी विषय जिसका विभाग से संबंध हो,
1.1.13 दुग्ध,दुग्ध उत्पाद् आदेश, 1992 के अन्तर्गत पंजीयन,
1.2 विभाग के अन्तर्गत आने वाले उपक्रम/निगम मंडलों का विवरण,
1.2.1 मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड,
1.2.2 मध्यप्रदेश सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित,
1.2.3 मध्यप्रदेश पशुधन कुक्कुट विकास निगम,
1.2.4 मध्यप्रदेश कुक्कुट विकास संघ,
1.3 अधीनस्थ संस्थाएं
1.3.1 संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं,
1.3.2 पशु स्वास्थ्य जैविक उत्पाद संस्थान महूॅं जिला इन्दौर,
1.3.3 संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवायें, समस्त संभाग,
1.3.4 उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें समस्त जिले,
1.3.5 राज्य पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला, भोपाल,
1.3.6 माता महामारी उन्मूलन कार्यक्रम म0प्र0, भोपाल,
1.3.7 मुॅंहखुरी रोग व्यापकी इकाई, भोपाल,
1.4.8 कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केन्द्र भोपाल/मंडला,
1.3.9 सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान शिवपुरी,
1.3.10 राज्य पशु चिकित्सालय भोपाल,
1.3.11 जर्सी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र भोपाल,
1.3.12 पशु प्रजनन प्रक्षेत्रटीकमगढ़/शाजापुर/खरगौन/सागर/छिंदवाड़ा/बालाघाट
1.3.13 वृषभ पालन प्रक्षेत्र जबलपुर,
1.3.14 भेंड़ प्रजनन प्रक्षेत्र पड़ोरा, शिवपुरी,
1.3.15 उप संचालक,कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र एंव अनुसंधान केन्द्र भोपाल,
1.3.16 कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र, इन्दौर/ग्वालियर/जबलपुर/रींवा/शहडोल/छिंदवाड़ा/ झाबुआ/गुना,
1.3.17 कुक्कुट प्रशिक्षण विद्यालय,रींवा
1.4 विभाग द्वारा प्रसारित नियम तथा अधिनियम:-
(1) मध्यप्रान्त पशुवध अधिनियम, 1915
(2) मध्यप्रदेश कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 1959
(3) मध्यप्रदेश पशु नियंत्रण अधिनियम, 1976
(4) मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एंव कुक्कुट विकास अधिनियम, 1982
(5) चारा नियंत्रण आदेश 2000
(6) मध्यप्रदेश गौपालन एंव पशुधन संवर्धन बोर्ड नियम 2004
;7द्ध मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध नियम 2004
(8) मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004
भारत सरकार द्वारा प्रसारित नियम व अधिनियम प्रदेश में लागू
(1) पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960
(2ृ) भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984
(3) दुग्ध एंव दुग्ध पदार्थ आदेश 1992
(9) पशु संक्रामक रोग प्रकोप रोकथाम अधिनियम 2009
(9) पशुओं के संक्रामक एंव संसर्गजन्य रोगों के रोकथाम अधिनियम 2009
1.5 विभाग का दायित्व
प्रदेश के पशुओं / पशुधन व कुक्कुट पक्षियों का संरक्षण,संवर्धन एंव विकास।
1.6 विभाग की सामान्य जानकारी
(1) प्रदेश का कुल क्षेत्रफल (हजार वर्ग किलोमीटर में) 308
(2) प्रदेश की कुल जनसंख्या (हजार में) 60348
(3) प्रदेश की कुल पशुधन संख्या(पशु संगणना2007 के अनुसार 40692752
(4) प्रदेश की कुल गौवंशीय पशु (पशु संगणना 2007के अनुसार 21915438
(5) प्रदेश की कुल भैंसवंशीय पशु (पशु संगणना 2007 के अनुसार) 9129152
(6) प्रदेश में कुल पशु चिकित्सालय 608
(7) प्रदेश में कुल पशु औषधालय 1738
(8) प्रदेश में टीकाद्रव उत्पादन संस्था (मॅहू) 1
(9) प्रदेश में कुल कृत्रिम गर्भाधान संस्थाएं 2236
अध्याय दो
पशुपालन- विकास की दृष्टि से
2.1 महत्वपूर्ण सांख्यिकी

2.1.1 पशुधन विकास देश व प्रदेश की आर्थिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण घटक होते हुए सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि की अपार संभावनाओं को समाहित किये हुए है। कृषि आधारित आर्थिकी में फसलों व पशुधन के उत्पाद की सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी की वृद्धि एक दूसरे पर निर्भर करती है, विशेष तौर पर जहाॅं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 70 प्रतिशत् से अधिक भूमिहीन, लघु व सीमान्त कृषक पशुपालन पर निर्भर हैं। वर्ष 1980-81 से वर्ष 2002-03 तक जहाॅं कृषि क्षेत्र के उत्पाद की सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी 13.9 प्रतिशत कम हुई है वहीं दूसरी ओर पशुधन उत्पादन की सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी स्थिर रही। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में प्रदेश स्तर पर जहाॅं कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान वर्ष 1998-99 में 33.32 प्रतिशत से कम होकर वर्ष 2003-04 में 28.07 प्रतिशत् रह गया है, वहीं दूसरी ओर इसी अवधि में पशुपालन का योगदान 8-10 प्रतिशत पर यथावत रहा।

2.2 मध्यप्रदेश में पशुधन विकास

2.2.1 भारत जहाॅं विश्व में उन राष्ट्रों में से एक है जिनकी आर्थिकी पशुधन पर निर्भर है व सर्वाधिक गौ व भैंसवंश वाला राष्ट्र है वहीं दूसरी ओर म.प्र. भारतवर्ष में सर्वाधिक गौवंश वाला प्रदेश होते हुए दुग्ध उत्पादन में सातवें स्थान पर है अर्थात उत्पादकता में कमी पशुपालन विभाग के लिए एक चुनौती है। जिलेवार पशुधन संख्या परिशिष्ट एक में दी गई है।

18वीं पशु संगणना 2007 एवं 17वीं पशु संगणना 2003 की तुलनात्मक स्थिति
क्रमंाक विवरण पशु संगणना 2007 पशु संगणना 2003 प्रतिशत् वृद्धि / कमी
1 गौवंशीय पशु 21915438 1,89,12,611 +11.6
2 भैंस वंशीय पशु 9129152 75,75,299 +20.5
3 भेंड़ा/भेंड़ी 389863 5,46,366 -28.6
4 बकरे/बकरियाॅ 9013687 81,41,983 +10.7
5 घोड़े/घोड़ियाॅ,टट्टू 26648 31,613 -15.7
6 खच्चर 543 4,167 -87.0
7 गधे 20199 38,714 -48.0
8 ऊॅंट 5456 8,161 -33.1
9 सूअर 192766 3,58,085 -46.1
कुल पशुधन 40692752 3,56,16,999 +14.3
10 कुत्ते 7,91,356 15,22,848 -49.0
11 खरगोश 10,712 13,919 -23.0
कुल कुक्कुट 73,84,318 117,04,725 -37.0
स्त्रोतः 17वीं एंव 18वीं पशु संगणना

2.2.2 18वीं पशु संगणना के आधार पर म.प्र. में 17वीं पशु संगणना की तुलना में गौवंश में 11.6 प्रतिशत् की वृद्धि व भैंस वंश में 20.5 प्रतिशत् की वृद्धि हुई है। जिलेवार दुग्ध उत्पादन परिशिष्ट दो में अंकित हैं।

2.2.3 म.प्र. में बकरी पालन पर भी विशेष बल दिये जाने की आवश्यकता को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है, विशेषतौर पर बुन्देलखण्ड व मालवा क्षेत्र के ऐसे जिलों में जहाॅं 18वीं पशु संगणना के आधार पर बकरे बकरी पशुधन में वृद्धि दर 10.7 प्रतिशत है। विभाग द्वारा विनिमय के आधार पर जमनापारी बकरा इसी उददेश्य से प्रदाय किया जा रहा है ताकि दुग्ध व मंास उत्पादन में खपत के आधार पर वृद्धि लाई जा सके।

2.2.4 दुधारु पशुओं में उत्पादकता कम होने का मुख्य कारण प्रदेश में हरे चारे की कमी है। वर्ष 2000 से 2003 में हरे चारे में 2.4 प्रतिशत की कमी आई है जबकि पूर्व में ही हरा चारा मंाग के विरुद्ध 83प्रतिशत कम था। यद्यपि सूखा चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है किन्तु वर्ष 2000 से 2003 में 27.7 प्रतिशत चारे की कमी रही। पशुपालन विभाग द्वारा मिनीकिट वितरण के माध्यम से चारा उत्पादन हेतु प्रयास किये गये हैं ।

2.4.5 पशुपालन में निवेश करने पर निम्नानुसार लाभ होगें:-
  • गरीबी उन्मूलन: 70 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण पशुपालन पर निर्भर हैं व अधिकतर ऐसे लोग हैं जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं। विशेषकर पशुपालन में महिलाओं की भागीदारी सर्वाधिक रहती है। अतः पशुपालन से ग्रामीण महिलाएं स्वावलंबी बनेंगी।
  • पौष्टिक आहार: उत्पादन में वृद्धि होने पर पशुधन उत्पादों की खपत में वृद्धि होगी जो आम जन को उपलब्ध होगा, इससे पौष्टिक आहार की कमी से होने वाले रोगेां से बचा जा सकेगा।
  • निर्यात में वृद्धि व आयात में कमी: पशुधन उत्पाद में वृद्धि से वैकल्पिक खाद्य पदार्थों के आयात में कमी व निर्यात में वृद्धि की संभावना होगी।
  • खाद ऊर्जा का स्त्रोत: फसलों के लिए जैविक खाद व खेत जोतने के लिए पशुओं का उपयोग फसल की उत्पादकता में वृद्धि के लिए उपयागी होगा जो कृषि आधारित आर्थिकी में अत्यंत अनिवार्य है।
  • स्वास्थ्य मानव संसाधनः पशुधन को स्वस्थ रखा जाकर मनुष्यों को संक्रमण होने वाले रोगों से बचाव किया जा सकेगा।बर्ड फ्लू व स्वाइन फ्लू इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
अध्याय तीन
पशुपालन विभाग - उद्देश्य व रणनीति

3.1 विभाग का उद्देश्य

3.1.1पशुपालन विभाग का उद्देश्य पशु स्वास्थ्य रक्षा, पशु संवर्धन,पशुप्रबंधन, उन्नत पशु प्रजनन के माध्यम से पशुधन तथा कुक्कुट विकास के द्वारा पशुधन एंव कुक्कुट उत्पाद में वृद्धि करना तथा कमजोर वर्ग के हितग्राहियों को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक लाभ पहॅुचाना है। तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

3.2 उद्देश्यों की पूर्ति हेतु रणनीति

3.2.1 पशु स्वास्थ्य रक्षा।
3.2.2 पशुधन एंव कुक्कुट का संरक्षण,संवर्धन।
3.2.3 रोजगार मूलक योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों का आर्थिक उत्थान।

3.3 पशु स्वास्थ्य रक्षा

3.3.1 नस्ल उन्नयन से पशुओं में अनुवांशिक रोगों सहित विभिन्न रोगों के होने की संभावना बढ़ गई है। उन्नत प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से मध्यप्रदेश में उत्पादक पशुधन की संख्या में वृद्धि हुई है। पशुधन में उत्पादकता बनाये रखने के लिए उनका स्वस्थ रहना अत्यन्त आवश्यक है।

तालिका 3.1
प्रदेश में पशु स्वास्थ्य रक्षा के लिए संचालित संस्थायें
पशु चिकित्सालय 608 माता महामारी उन्मूलन कार्यक्रम:-
पशु औषधालय 1738 अनुगामी इकाई 9
चल पशु चिकित्सा इकाई 38 सतर्कता इकाई 7
विरुजालय 27 सामूहिक टीकाकरण दल 8
रोग अन्वेषण प्रयोगशालायें 22 रोग शमन दल 2
मुंहखुरी रोगव् यापकी इकाई 1 पशुनिरोधस्थल
(क्वारनंटाइन स्टेशन)
8
जैविक उत्पाद् संस्थान 1 पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय 1
पशु चिकित्सा महाविघालय 3

3.3.2 पशुओं की स्वास्थ्य रक्षा उपचार,औषधि वितरण,टीकाकरण, नमूनों की जांच आदि से की जाती है। पशुओं का उपचार न केवल पशु चिकित्सालयों व पशु औषधालयों में किया जाता है, बल्कि चल पशुचिकित्सा इकाई/ विरुजालय व पशु चिकित्सा शिविरों में भी किया जाता है। सामान्य रोगों व डिवर्मिग हेतु औषधि संस्थाओं अथवा शिविरों में वितरित की जाती है।

3.3.3 संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु समसामयिक टीकाकरण किया जाता है। टीकाकरण हेतु जिला स्तर पर निम्नानुसार विन्दुओं पर ब्ल्यू प्रिंट तैयार किये जाते है:-

  • ऐसे ग्रामों की 5 किमी0 की परिधि में आने वाले ग्रामों के समस्त पशु जहांॅ गत् तीन वर्षों में किसी संक्रामक रोग का उद्भेद हुआ हो।
  • ग्वारियों में जाने वाले पशु।
  • प्रदेश के बाहर आवागमन मार्गो से आने-जाने वाले पशु।
  • बाजार में बाहर से आने वाले पशु।
  • वन क्षेत्र की सीमा में आने वाले ग्रामों के पशु।

3.3.4 संक्रामक रोगों में मुंहखुर पका रोग ;एफ.एम.डी.द्ध,एक टंगिया अथवा चुरका रोग ;बी.क्यूद्ध, गलघोंटू अथवा घटसर्प रोग ;एच.एस.द्ध, छड़ ;एंथ्रेक्सद्ध, पी.पी. आर.,स्वाईन फीवर, एंट्रोटोक्सिमिया, रैबीज, रानीखेत (कुक्कुट), फाउल पाॅक्स(कुक्कुट), स्पाईरोकीटोसिस(कुक्कुट), मैरेक्स(कुक्कुट), गंबोरो(कुक्कुट) का टीकाकरण किया जाता है।

3.3.5 प्रदेश में पशु संसर्गजन्य ;ब्वदजंहपवनेद्ध पशु रोगों के रोकथाम हेतु ;महूॅंद्ध में स्थित जैविक उत्पाद् संस्थान में चार प्रकार के जीवाणु टीकों,दो प्रकार के टिशू कल्चर ;विषाणुद्ध टींकों सहित कुल 12 प्रकार के टीके तथा तीन प्रकार के टीका घोलकों का उत्पादन किया जाता हैं। मुंहखुरपका रोग व पी.पी.आर. को छोड़कर समस्त संक्रामक रोगों के टीका का निर्माण इस जैविक उत्पाद् संस्थान में किया जाता है।

3.3.6 यह संस्थान प्रदेश में टीकाद्रव की आवश्यकता की पूर्ति करता है। छत्तीसगढ़ राज्य को टीका द्रव्य प्रदाय करने के साथ विशेष परिस्थितियों में आवश्यकतानुसार देश के अन्य राज्यों को भी टीका द्रव्य प्रदाय किया जाता है

3.4 नस्ल सुधार

3.4.1 पशु संगणना 2007 (त्वरित) के अनुसार प्रदेश में 406.93 लाख कुल 28 लाख तथा संकर नस्ल की 2.32 लाख हैं। भैंस वंशीय प्रजनन योग्य मादा पशु संख्या 46.45 लाख है। इस प्रकार कुल गौ$भैंस वंशीय प्रजनन योग्य मादाओं पशु संख्या 121.05 लाख है। प्रदेश में उपलब्ध पशुओं में अवर्णित नस्ल के पशु बहुतायत में पाये जाते हैं। इन पशुओं में उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश में पशु नस्ल उन्नयन कार्यक्रम संचालित है जिनके अन्तर्गत कृत्रिम तथा नैसर्गिक गर्भाधान से इन पशुओं में उन्नत प्रजनन किया जाता है।

3.4.2 प्रदेश के देशी वर्णित पशुधन

  1. खरगोन व बड़वानी जिले में निमाड़ीशाजापुर,देवास,इन्दौर व उज्जैन जिलों में मालवी नस्ल के पशु अपने भारवाहक क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं।
  2. इसी प्रकार निमाड़ क्षेत्र में निमाड़ी नस्ल के ्पशु अपने भारवाहक क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं।
  3. टीकमगढ़ व पन्ना क्षेत्र में केनकाठा नस्ल के पशु प्रसिद्ध हैं।
  4. भैंस वंश में भदावरी उत्तरी मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में पायी जाती है। जो कि दुग्ध उत्पादन हेतु तुल्नात्मक दृष्टि से अच्छी है।
  5. मध्यप्रदेश के झाबुआ तथा धार जिले में प्रदेश की महत्वपूर्ण ख्याति प्राप्त कुक्कुट नस्ल कड़कनाथ पाई जाती हैं। इसके सरंक्षण तथा संवर्धन हेतु विभाग में कड़कनाथ प्रक्षेत्र झाबुआ संचालित है।
  6. इनके संवर्धन एंव सरंक्षण हेतु नियंत्रित पशु प्रजनन कार्यक्रम संचालित है।

गौ-भैंस वशीय पशु प्रजनन नीतिः-

  1. . स्थानीय गौ-नस्ल के संरक्षण हेतु ब्रीडिग ट्रैक्ट्स में चयनित प्रजनन-मालवा ट्रैक्ट्स के शाजापुर उज्जैन राजगढ़ जिले में,निमाड़ क्षेत्र के खरगौन,बड़वानी जिलों में निमाड़ी,बुन्देलखंड क्षेत्र के जिला पन्ना व छतरपुर जिले की लौड़ी तहसील में केनकाठा नस्ल से चयनित प्रजनन।
  2. ग्रामीण क्षेत्र में क्षेत्र विशेष अनुसार देशी वर्णित नस्ल से उन्नयन। मुख्यतः हरियाणा,साहीवाल,थारपारकर, व गिर नस्ल।
  3. शहरी,अर्द्धशहरी, मिल्कशेड व औद्याोगिक क्षेत्र में जर्सी व हौलिस्टीन फ्रीजियन से संकर प्रजनन। तथा उपयुक्त 50 प्रतिशत् विदेशी रक्त एंव प्रगतिशील पशुपालकों पर 62.5 प्रतिशत तक।
  4. उत्तरी मध्यप्रदेश के भिंड जिले व समीपस्थ जुड़े क्षेत्र में भदावरी भैंस वंश से उन्नयन।
  5. मध्यपदेश के सामान्यतः शेष क्षेत्र में मुर्रा नस्ल से उन्नयन।

लघु पशु प्रजनन नीति

  1. राज्य के उत्तरी क्षेत्र में जमनापारी बकरों की नस्ल से चयनित प्रजनन।
  2. राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में बारबरी बकरों की नस्ल से उन्नयन।
  3. प्रदेश के शेष क्षेत्र में जमनापारी नस्ल से उन्नयन।
  4. कारीडेल,रेम्बोलेट की संकर भेड़ नस्ल से स्थानीय भेंड़ों का उन्नयन।
  5. मिडिल व्हाइट यार्कशायर सूकर नस्ल से स्ािानीय सूकरों का उन्नयन। पशुपालकों पर रंगीन सूकरों से स्थानीय सूकरों का उन्नयन।

ब्रीडिंग जोन:-

मध्यप्रदेश को कृषि जलवायु क्षेत्र के आधार पर निम्नलिखित सात पशु प्रजनन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:-

  1. उत्तर नदीय पठारः भिण्ड,मुरैना व ग्वालियर जिले,दतिया जिले का आंशिक भाग।
  2. शिवपुरी की लैट्रेटिक पट्टी एंव जिला गुना का आंशिक भाग।
  3. मालवापठार (विदिशा,रायसेन,सीहोर,राजगढ़,शाजापुर,उज्जैन,रतलाम,इन्दौर,देवास जिले) धार व झाबुआ जिलों के उत्तरी भाग तथा गुना जिले का आंशिकभाग।
  4. निमाड़ी क्षेत्र खरगौन ,खण्डवा व हरदा जिले झाबुआ जिले की अलीराजपुर तहसील,धार जिले की कुक्षी, मनावर तहसील तथा बैतूल जिले की बैतूल व भैंसदेही तहसील।
  5. पश्चिम विन्घ्य पठार नर्वदा घाटी सागर,नरसिंहपुर,होशंगाबाद,जबलपुर व सिवनी जिले,दमोह जिले की दमोह तहसील व छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा तहसील,दमोह जिले की हटा तहसील, कटनी जिले की मुरवारा तहसील व सींधी जिले का उत्तरी भाग।
  6. पूर्वी सतपुड़ा पठार शहडोल,उमरिया व बालाघाट जिले, सिवनी जिले की लखनादोन तहसील।
  7. उक्त पठारी क्षेत्रों में शहरी समतल व पठारी क्षेत्र में विभाजित किया गया है।
  8. दुग्धोत्पादन में वृद्धि हेतु प्रजनन नीति मिल्क रुट क्षेत्र में प्राथमिकता पर जर्सी/होलिस्टीन से संकर प्रजनन ब्रीडिग ट्रैक्ट्स में राज्य की स्थापित तथा मान्य नस्लों से चयनित प्रजनन तथा ग्रामीण अंचलों में अवर्णित नस्ल केपशुओं में वर्णित उच्च नस्ल के पशुधन साहीवाल,हरियाणा व थारपारकर से उन्नयन तथा संकर प्रजनन कार्य किया जा रहा है।

3.4.4 संचालित संस्थाएं एंव कार्यक्रम

प्रदेश में 121.05 लाख प्रजनन योग्य मादा पशुओं में से लगभग 23.80 लाख पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान से उन्नत प्रजनन के दायरे में लाने के लिए विभागीय संस्थाएं कार्यरत हैं। उपरोक्त संस्थाओं द्वारा कृत्रिम गर्भाधान व नैसर्गिक गर्भाधान सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्नत प्रजनन हेतु देशी गाय भैंसों को उन्नत नस्ल के सांड़ों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान विधि द्वारा गर्भित किया जाता है

संचालित संस्थाएं एंव कार्यक्रम

क्रमांक संस्था का नाम संख्या
1 हिमीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान संस्थाएं 2,236
2 कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान 5
3 फ्रोजन सीमेन बुल स्टेशन 1
4 फ्रोजन सीमेन बैंक 7
5 नियंत्रित पशु प्रजनन कार्यक्रम अन्तर्गत पशु प्रजनन इकाई 125
6 गहन पशु विकास परियोजना 17
7 मुख्य ग्राम योजना 38
8 नियंत्रित पशु प्रजनन कार्यक्रम 5
10 नन्दीशाला योजना 01
11 समुन्नत पशु प्रजनन कार्यक्रम 01
12 गौभैंसवंशीय पशुप्रजनन परियोजना 01

3.5 हितग्राहीमूलक योजनाएं

3.5.1 पशुपालन विभाग में व्यक्तिमूलक कार्यक्रमों के अन्तर्गत निम्नलिखित कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं:-

  • गहन कुक्कुट विकास कार्यक्रम अन्तर्गत कुक्कुट इकाइयों का प्रदाय,अनुदान के आधार पर बकरों का प्रदाय,अनुदान के आधार पर शूकरत्रयी/सूकर इकाई का प्रदाय,विशेष पशु प्रजनन कार्यक्रम,अनुदान पर सांड़ों का प्रदाय,नंदीशाला योजना,स्वरोजगार हेतु युवकों को कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण,ऋण एंव अनुदान पर बकरी इकाई का प्रदाय,ऋण एंव अनुदान पर दुधारु पशु इकाईयों का प्रदाय,कड़कनाथ चूजों का अनुदान पर प्रदाय।

3.5.2 विशेष पशु प्रजनन कार्यक्रम

यह योजना संकर जर्सी मादा वत्सपालन कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्ष 1975-76 से संचालित है। यह योजना सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए है। इस योजना का उद्देश्य लघु/सीमान्त कृषक/भूमिहीन खेतिहर मजदूर की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना,दुग्ध उत्पादन में वृद्धि,नस्ल सुधार लाना है। इस योजना के अन्तर्गत अनुदान की अधिकतम राशि सामान्य वर्ग के लिए रुपये 3,000,अनुसूचित जाति के लिए रुपये 5,000, तथा अनुसूचित जनजाति के लिए रुपये 5,000,निश्चित है।

3.5.3 अनुदान के आधार पर बकरों का प्रदाय:-

यह योजना केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों के लिए वर्ष 1979-80 से संचालित है। यह योजना सामान्य योजना में वर्ष 2008-09 से योजना लागू की गई है। इस योजना का उदद्ेश्य देशी बकरियों में नस्ल सुधार लाना,हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना,मंास तथा दुग्ध उत्पाद में वृद्धि करना है। इस योजना में उन्नत नस्ल का जमुनापारी बकरा अनुदान के आधार पर अनुसूचित जाति,जनजाति के हितग्राही को प्रदाय किया जाता है। हितग्राही से इसके बदले में उसके पास उपलब्ध देशी बकरा प्राप्त कर उसी ग्राम में उसका घोष विक्रयकर प्राप्त राशि कोषालय में जमा कर दी जाती है। इस योजना की इकाई लागत 4000.00 रुपये है।

3.5.4 अनुदान के आधार पर नर-सूकर प्रदाय:-

यह योजना केवल अनुसूचित जाति के हितग्राहियों के लिए वर्ष 1979-80 से संचालित है। इस योजना का उद्देश्य देशी/स्थानीय सूकरों की नस्ल में सुधार लाकर हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना,तथा मंास उत्पादन में वृद्धि करना है। इस योजना में अनुसूचित जाति के सूकर पालक को उन्नत नस्ल का एक नर सूकर अनुदान के आधार पर प्रदाय करने का प्रावधान है। इस योजना की इकाई लागत रुपये 2750.00 है।

3.5.5 अनुदान के आधार पर सूकर-त्रयी का प्रदाय:-

यह योजना केवल अनुसूचित जनजाति के हिग्राहियों के लिए वर्ष 1979-80 से संचालित है। इस योजना का उद्देश्य देशी/स्थानीय सूकरेंा की नस्ल में सुधार लाकर हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना एंव मंास उत्पादन में वृद्धि करना है। इस योजना में केवल अनुसूचित जनजाति के सूकर पालक को उन्नत नस्ल का एक नर सूकर एवं दो मादा सूकर अनुदान के आधार पर प्रदाय करने का प्रावधान है। इस योजना की इकाई लागत रुपये 7200.00 है।

3.5.6 ग्रामीण स्तर पर समुन्नत पशु प्रजनन:-

यह योजना सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए वर्ष 1999-2000 से संचालित है। इस योजना का उद्देश्य सुदूर ग्रामीण अंचलों में जहाॅं कृत्रिम गर्भाधान सुविधा उपलब्ध नहीं है, ऐसे क्षेत्रों में नस्ल सुधार हेतु उन्नत नस्ल के सांडों द्वारा प्राकृतिक गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध कराना। प्रशिक्षित गौसेवकों को प्राथमिकता के आधार पर अनुदान पर भैंसा सांड उपलब्ध कराकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा नस्ल सुधार है। इस योजना की इकाई लागत रुपये 10,850.00 है।

3.5.7 नन्दीशाला योजना:-

यह योजना फरवरी 2006 से संचालित है। इस योजना का उददेश्य ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय अवर्णित/श्रेणीकृत गौवंशीय पशुओं की नस्ल उन्नयन हेतु देशी वर्णित नस्ल के सांडों का प्राकृतिक गर्भाधान सेवायें हेतु पशुपालकों को प्रदाय करना है। योजना प्रदेश के सभी जिलो के ग्रामीण क्षेत्र के लिए है। यह योजना ग्राम पंचायत स्तर पर प्रगतिशील पशुपालकों को अनुदान पर प्रजनन योग्य देशी वर्णित जैसे-साहीवाल, थरपारकर, हरियाणा, गिर, गौलव, मालवी, निमाणी, केनकथा आदि नस्ल के गौ-सांड प्रदाय किये जाते हैं। इस योजना के अन्तर्गत सभी वर्ग के पशुपालक जिनके पास पर्याप्त कृषि भूमि के साथ न्यूनतम 5 गौवंशीय पशुधन या जिनके पास कृषि भूमि नहीं है किन्तु 20 या उससे अधिक पशु है,हितग्राही के श्रेणी में आते हैं। योजनान्तर्गत साॅंड का मूल्य,परिवहन एवं बीमा राशि रुपये 12,500.00 तथा प्रदायित साॅंड के प्रथम 60 दिवस के लिए पशु आहार रुपये 1,500.00, व इकाई लागत राशि रुपये 14,000.00 है। उक्त में अनुदान राशि रुपये 11,200.00 (80प्रतिशत्) तथा हितग्राही अंशदान राशि रुपये 2,800.00(20प्रतिशत्) निर्धारित है।

3.5.8 कुक्कुट विकास

पशु संगणना 2003 के अनुसार राज्य की कुक्कुट, बतख, एंव अन्य पक्षी संख्या 117.05 लाख है। प्रदेश में देशी पक्षियों की उत्पादन क्षमता अन्य उन्नत नस्ल के पक्षियों की अपेक्षा बहुत कम है। इन देशी पक्षियों के अण्डा उत्पादन क्षमता में सुधार हेतु तथा विभागीय बैकयार्ड कुक्कुट योजना के हितग्राहियों को चूजे प्रदाय करने हेतु पालन व प्रजनन किया जाता है। इन प्रक्षेत्रों पर योजनाओं के अनुरुप चूजों का उत्पादन कर ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित किया जाता है। तथा प्रक्षेत्रों पर भक्ष्य पक्षियों तथा शेष अण्डों का विक्रय भी किया जाता है। इन प्रक्षेत्रों पर वर्ष 2008-09 में 14.54 लाख अण्डों का उत्पादन हुआ, तथा वर्ष 2009-10 में माह दिसम्बर तक 14.43 लाख अण्डे उत्पादित हुए।

3.5.9 वैकयार्ड कुक्कुट पालन:-

बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना वर्ष 1999-2000 से प्रारम्भ की गई है। वर्ष 1999-2000 से वर्ष 2007-08 तक योजना की इकाई लागत 600 थी जिसमें 75 प्रतिशत् अनुदान राशि रुपये 450 एंव हितग्राही का अंशदान 25 प्रतिशत् रुपये 150 का प्रावधान था। इस योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति एंव अनुसूचित जनजाति वर्ग की आय तथा पोषण स्तर में सुधार लाने के उददेश्य से 15 दिवसीय 65 उत्तम नस्ल के रंगीन चूजे/कुक्कुट आहार/औषधि एंव परिवहन व्यय सहित प्रदाय की जाती है। जिस योजना की प्रति इकाई लागत 1500 रुपये है1जिसमें अनुदान 80 प्रतिशत् राशि रुपये 1200 तथा हितग्राही अंशदान राशि 20 प्रतिशत् राशि 300 रुपये का प्रावधान है।

3.5.10 कड़कनाथ चूजों का प्रदाय

इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों कों कुक्कुट पालन के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने तथा कड़कनाथ नस्ल के संरक्षण के साथ-साथ उनका पोषण स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से हितग्राहियों को 15 दिवसीय 55 कड़कनाथ नस्ल के चूजे/कुक्कुट आहार/औषधि एंव परिवहन व्यय प्रति इकाई कुल लागत राशि रुपये 1500 का प्रावधान है। जिसमें 80 प्रतिशत् राशि रुपये 1200 तथा हितग्राही अंशदान राशि 20 प्रतिशत् राशि 300 रुपये जमा कराकर हितग्राहियों का योजना का लाभ दिया जाता है।

3.5.11 रानी खेत उन्मूलन योजना:-

पक्षियों में रानीखेत एक भयानक रोग है जिसमें बड़ी संख्या में कुक्कुट पक्षी मर जाते हैं। इस रोग की रोकथाम हेतु योजनाबद्ध तरीके से प्रतिबंधात्मक टीका लगाया जाता है। वर्तमान में यह योजना जिला झाबुआ एंव शहडोल में संचालित है। जिला झाबुआ एवं शहडोल में कुल पक्षियों की संख्या 12,54,510 है। इस योजना के अन्तर्गत मुर्गियों में रानीखेत बीमारी के प्रतिबंधात्मक टीके क्रमशः एफ1व आर2बी लगाये जाते हैं। तथा फाउलपाॅक्स के प्रतिबंधात्मक टीके भी लगाये जाते हैं।

3.5.12 चारागाह विकास कार्यक्रमः-

इस योजना के तहत् म0प्र0 के वन विभाग के 340 हेक्टेयर पड़त भूमि पर चारागाह विकास कार्य किया जा रहा है। साथ ही पशुपालन विभाग के सभी प्रक्षेत्रों के 380 हेक्टेयर पड़त भूमि पर एंव गौशालाओं के 100 हेक्टेयर पड़त भूमि पर यह कार्य किया जा रहा है।

3.5.13 अनुदान पर बकरी इकाइयों का प्रदाय

यह योजना सभी वर्ग के भूमिहीन, कृषि मजदूर,सीमान्त एंव लघु कृषकों के लिए वर्ष 2008-09 से प्रदेश के सभी जिलों में प्रारम्भ की गई है। इस योजना का उद्देश्य देशी बकरियों में नस्ल सुधार लाना, हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, तथा मंास एंव दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है। यह योजना अनुसूचित जनजाति/ अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अनुदान तथा सामान्य वर्ग के लिए 25 प्रतिशत् अनुदान एंव 10 प्रतिशत् अंशदान व शेष बैंक ऋण का प्रावधान है।

3.5.14 अनुदान पर दुधारु पशु इकाइयों का प्रदाय

यह योजना प्रदेश के सभी जिलों में वर्ष 2008-09 से प्रारम्भ की गई है।इस योजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, तथा प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता निश्चित करना है। यह योजना अनुसूचित जनजाति/ अनुसूचित जाति हेतु रुपये 10000.00/अनुदान तथा सामान्य वर्ग हेतु रुपये 7500.00 अनुदान एंव 10 प्रतिशत् हितग्राही अंशदान व शेष बैंक ऋण का प्रावधान है। इस योजना का लाभ लेने हेतु हितग्राही अपने निकटतम पशु चिकित्सा संस्था से सम्पर्क कर लाभ ले सकेगा।

3.5.15 गौसेवक योजना

विभाग में यह योजना 2अक्टूबर 1997 से प्रारम्भ की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वरोजगार के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्ष 2009-10 माह दिसम्बर तक कुल 19659 गौसेवकों को प्रशिक्षित किया गया।

3.5.16 आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना

प्रदेश में 11वीं पंचर्षीय योजनान्तर्गत राज्य सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग की अनुशंसाओं के तहत आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का क्रियान्वयन एमपी स्टेट को-आॅपरेटिव डेयरी फेडरेशन व इस से संबंद्ध 5 क्षेत्रीय दुग्ध संघ द्वारा क्रिया जा रहा है।

उद्देष्य

इस योजना का मूल उद्देष्य ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब किसानों एवं निर्धन परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने हेतु सामान्य वर्ग की निर्धन महिलाओं केा भारतीय उन्नत नस्ल की 2 गाय हेतु अनुदान एवं ऋण के रूप में वित्तीय सहयोग प्रदत्त करना है।

3.6 पशु रोगी कल्याण समिति

3.6.1 मध्यप्रदेश शासन पशुपालन विभाग मंत्रालय के पत्र क्रमंाक एफ-23/2/99/35 दिनंाक 11.2.99 द्वारा राज्य के सभी जिलों में पशु कल्याण समितियों का गठन 10 उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है। वर्तमान में सभी 45 जिलों में समितियों का गठन हो चुका है। पशु कल्याण समितियों के उद्देश्य निम्न प्रकार हैं:-

  1. क्षेत्र के पशुओं के उपचार की व्यवस्था करना।
  2. पशुपालन की सुविधा उपलब्ध कराना।
  3. अन्र्तवासी रोगी पशुपालकों को चिकित्सालय में ठहरने की व्यवस्था करना।
  4. पशु चिकित्सा भवनों में सुधार करना।
  5. राज्य गौ संवर्धन बोर्ड की अनुमति से अनुदान प्राप्त गौशालाओं की देखभाल/पर्यवेक्षण करना।
  6. पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का पालन करना।
  7. पशु पक्षियों के कल्याण के कार्यक्रमों के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  8. पालतू जानवरों का टीकाकरण तथा उपचार करना।
  9. रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम का प्रचार एंव सहयोग करना।
  10. पशु चिकित्सा एंव उन्नत प्रजनन से संबंधित अन्य कार्य।

3.6.2 राज्य में कार्यरत पशु चिकित्सालय /पशु औषधालयों तथा अन्य विभागीय संस्थाओं के माध्यम से उपचार करते हुए, प्रदेश के पशुधन की देखभाल सुरक्षा व्यवस्था निश्चित कराते हुए पशु कल्याण समितियों को अपने उद्देश्यों को प्राप्त किये जाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

3.6.3 जिला पशु कल्याण समितियों में कलेक्टर कार्यकारी निर्देशक अध्यक्ष,उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें पदेन सचिव व सदस्य एंव जिला स्तर के पशु चिकित्सालय का प्रभारी पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ सदस्य उप सचिव सहित 11-12 सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त समिति में जिले के निर्वाचित दो विधायक भी सदस्य होते हैं।

3.7 आसरा

बेसहारा पशुओं को उपचार व आश्रय के माध्यम से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा ‘‘आसरा’’के नाम से यह नवाचार प्रारम्भ किेया गया है। आसरा के अन्तर्गत आश्रय स्थल में श्वानों की शल्य क्रिया द्वारा नसबंदी की जाकर एंटीरैबीज का टीकाकरण भी किया जाता है, ताकि क्षेत्र को रैबीज रोग से मुक्त रखा जा सके।

3.8 केन्द्रीय प्रवर्तित योजनाएं

3.8.1 एकीकृत नमूना सर्वेक्षण

  1. इस योजना के अन्तर्गत केन्द्र से प्रदेश को 50ः50 के आधार पर वित्तीय सहायता दी जाती है। ताकि नमूना सर्वेक्षण के आधार पर दूध, अण्डा, ऊन व मंास जैसे प्रमुख पशुधन उत्पादों के उत्पादन का आंकलन किया जा सके। पशुधन उत्पाद का आंकलन मौसमी तथा वार्षिक आधार पर किया जाता है।
  2. 10वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इस योजना में निम्नलिखित दो नये घटक जोड़े गये हैं:-
  • नमूना सर्वेक्षण से संबंधित आंकड़ा विश्लेषण कार्य के लिए सूचना प्रोद्योगिक समाधान उपलब्ध कराना।
  • कर्मचारियों के लिए एएकीकृत नमूना सर्वेक्षण पद्धतियों में रिफरेशर प्रशिक्षण

3.8.2 महत्वपूर्ण पशु रोगों की विधिवत् रोकथाम

  1. केन्द्र व राज्य शासन के कमशः 75ः25 के अनुपात में वित्तीय प्रबन्ध के आधार पर यह योजना संचालित है। इस योजनान्तर्गत आर्थिक रुप से महत्वपूर्ण पशुधन कुक्कुट रोगों के नियंत्रण के लिए टीकाकरण जैविक उत्पाद संस्थान पशु रोग अनुसंधान प्रयोग शालाओं के सुदृढ़ीकरण तथा पशु चिकित्सकों व गैर पशु चिकित्सकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण का प्रावधान रहता है।
  2. एवियन इन्फ्लूएंजा के रोग के प्रकोप की रोकथाम हेतु प्रशिक्षण, औषधि की व्यवस्था का प्रावधान भी इसी योजनान्तर्गत किया गया है।

3.8.3 माता महामारी उन्मूलन कार्यक्रम

  1. माता महामारी उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत पशु माता महामारी रोग की खोज ;सर्वेलेन्सद्ध का कार्य किया जा रहा है। यह रोग विभाजित खुरों वाले पशुओं का अत्याधिक संक्रामक वायरल रोग हैं जो गौ वंश के साथ-साथ छोटे जुगालु करने वाले पशुओं में अत्यधिक मृत्यु का कारण बनता है।
  2. सम्पूर्ण प्रदेश में माता महामारी रोग से अनन्तिम मुक्ति संबंधी प्रथम स्तर की प्राप्ति 1मार्च 1998 व माता महामारी रोग से मुक्ति संबंधी द्वितीय स्तर की प्राप्ति 22 मई 2004 में हो गई थी। तृतीय तथा अन्तिम स्तर की प्राप्ति हेतु डोजियर ओ.आई.ई. के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है।
  3. वर्ष 2007-08 में केन्द्र शासन द्वारा रुपये 37 लाख का आंबटन प्राप्त हुआ था जिसका उपयोग किया जा चुका है।

3.8.4 स्वच्छ दुग्ध उत्पादन परियोजना ;ब्समंद डपसा च्तवकनबजपवद च्तवरमबज दृप्द्ध

(अ) बैतूल (मुलताई), धार, मंदसौर, ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना, बालाघाट

केन्द्र प्रवर्तित योजनान्तर्गत प्रदेश में दुग्ध संघों के बैतूल (मुलताई), धार, मंदसौर, ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना तथा बालाघाट जिलों में स्वच्छ दुग्ध उत्पादन कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु एमपीसीडीएफ द्वारा रूपये 323.52 लाख (भारत शासन - रू. 257.12 लाख, संस्था - रू. 66.40 लाख) की लागत के परियोजना प्रस्ताव को भारत शासन की स्वीकृति 27 अगस्त 2004 को प्राप्त हुई । परियोजनान्तर्गत परियेाजना कार्यक्षेत्र में 150 दुग्ध सहकारी समितियों के 10,231 दुग्ध उत्पादक सदस्यों को स्वच्छ दुग्ध उत्पादन कार्यक्रम पर प्रषिक्षण प्रदाय किया गया तथा 48 बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए । वर्तमान में शेष 16 अतिरिक्त बल्क मिल्क कूलर स्थापना की कार्यवाही जारी है ।

(ब) भोपाल, सीहोर एवं शाजापुर, देवास रतलाम

दसवीं पंचवर्षीय योजनान्तर्गत केन्द्र शासन के पुनरीक्षित दिशा निर्देश के आधार पर रू. 480.72 लाख (केन्द्र शासन का अंष रू. 380.97 लाख तथा दुग्ध संघ का अंष रू. 99.75 लाख) की लागत के परियोजना प्रस्ताव को केन्द्र शासन की स्वीकृति मार्च 2006 में प्राप्त हुई। इनमें भोपाल, सीहोर एवं शाजापुर जिलों के लिए रू. 224.36 लाख, देवास जिले के लिये 128.26 लाख तथा रतलाम जिले के लिए रू. 128.10 लाख शामिल हैं। केन्द्र शासन से परियोजनांतर्गत संपूर्ण राशि प्राप्त हो चुकी है।

परियोजनान्तर्गत परियेाजना कार्यक्षेत्र में 186 दुग्ध सहकारी समितियों के 5744 दुग्ध उत्पादक सदस्यों को स्वच्छ दुग्ध उत्पादन कार्यक्रम पर प्रषिक्षण प्रदाय की गई तथा 57 बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए । वर्तमान में 12 अतिरिक्त बल्क मिल्क कूलर स्थापना की कार्यवाही जारी है ।

3.8.5 इंदौर दुग्ध संघ का पुर्नवास:

योजनान्तर्गत वर्ष 2009-10 में माह दिसम्बर तक 1,388 गठित दुग्ध सहकारी समितियों के 36,949 दुग्ध उत्पादक सदस्यों के माध्यम से तक औसतन 1,28,396 किलोग्राम प्रतिदिन का दुग्ध संकलन एवं दुग्ध विक्रय करते हुए रू. 120.27 करोड़ की विक्रय प्राप्तियां अर्जित की गई। इसी वर्ष में दुग्ध संघ द्वारा रू. 350.31 लाख का संचालन लाभ अर्जित किया गया ।

3.9 केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना

3.9.1 18वीं पशु संगणना

केन्द्र प्रवर्तित योजनान्तर्गत मध्यप्रदेश में 18वीं पशु संगणना 15 अक्टूबर 2007 की स्थिति में प्रदेश के सभी ग्रामों में पशुधन गणना के आंकड़ों का संकलन पूर्ण किया गया है। पशु संगणना 2007 के आंकड़ों के प्रविष्टि का कार्य प्रचलन में है। प्रथम चरण में जिलों से प्राप्त गोषवारा के त्वरित आंकड़ों का प्रविष्टि कार्य पूर्ण कराकर भारत सरकार कृषि मंत्रालय, पशुपालन डेयरी एंव मतस्यपालन विभाग नई दिल्ली के साॅंख्यिकीय अनुभाग को प्रेषित किये जा चुके हैं। संगणना के द्वितीय एंव अंतिम चरण के परिवारवार डिटेल्ड टैबुलेशन डाटा-इन्ट्री कार्य किया जा रहा है, जो सम्पन्न होने पर भारत सरकार को प्रेषित किया जावेगा।

3.9.2 राष्ट्रीय गौ-भैंसवंशीय पशु प्रजनन परियोजना

राष्ट्रीय गौ-भैंसवंशीय पशु प्रजनन परियोजना का राज्य में प्रथम चरण ; वर्ष 2000-01 से 2006-07द्ध तथा द्वितीय चरण अवधि ;वर्ष 2007-08 से 2012-13द्ध है। परियोजना का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण प्रदेश है। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में कृत्रिम गर्भाधान व प्राकृतिक गर्भाधान सेवाओं को सुव्यवस्थित सुसंगठित कर द्वितीय चरण तक शत्-प्रतिशत् गौ-भैंसवंशीय मादा पशुओं को उन्नत प्रजनन के दायरे में लाना है। इस हेतु कृत्रिम गर्भाधान तंत्रका विस्तार कर घर पहुॅंच कृत्रिम गर्भाधान की व्यवस्था की गई है। सुदूर ग्रामीण अंचल में प्राकृतिक गर्भाधान सुविधा हेतु पशुपालकों को अनुदान पर उन्नत नस्ल के सांडों का प्रदाय किया जाता है। परियोजनान्तर्गत संचालनालय पशु चिकित्सा सेवायें म0प्र0 का आंबटित कार्यो के तहत् गौ-भैंसवंशीय मादा पशुधन से तहत् 37 प्रतिशत् उन्नत पशु प्रजनन के दायरे में लाया गया है। विभागीय 2325 कृत्रिम गर्भाधान संस्थाओं को चलित इकाई के रुप में परिवर्तित कर कृत्रिम गर्भाधान कार्य को सुव्यवस्थित सुसंगठित किया गया है। वर्ष 2009-10 तक 3722 विभागीय तकनीकी अमले को कृत्रिम गर्भाधान का रिफरेशर प्रशिक्षण विभागीय कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थानों में प्रदान किया गया है। वर्ष 2009-10 में माह दिसम्बर तक 112 निजी कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को कृत्रिम गर्भाधान का बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। सुदूर ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों के पशुओं को नैसर्गिक गर्भाधान सुविधा उपलब्ध कराने हेतु परियोजनान्तर्गत उन्नत प्रजनन कार्य से उन्नत वत्सोत्पादन में वृद्धि कर दुग्धोत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।

3.9.3 सघन डेयरी विकास कार्यक्रम ;

(अ) झाबुआ, छिंदवाडा तथा बालाघाट

दसवीं पंचवर्षीय योजना अंतर्गत भारत शासन द्वारा सघन डेयरी विकास कार्यक्रम अंतर्गत झाबुआ, छिंदवाडा तथा बालाघाट जिलों हेतु वर्ष 2005-06 में रू. 649.47 लाख की लागत के त्रिवर्षीय परियोजना स्वीकृत की गईं । परियोजनान्तर्गत प्रथम वर्ष तथा द्वितीय वर्ष की स्वीकृत राषि रू. 515.42 लाख केन्द्र शासन से प्राप्त हुई ।

(ब) हरदा, बड़वानी, नीमच श्योपुर तथा सिवनी

केन्द्र शासन द्वारा वर्ष 2006-07 में सघन डेयरी विकास कार्यक्रम अंतर्गत हरदा, बड़वानी, नीमच श्योपुर तथा सिवनी जिलों हेतु लागत रू. 1422.09 लाख की नवीन परियोजना, स्वीकृत की गई है ।

3.10 अन्य योजनाएं

3.10.1 एकीकृत आदिवासी डेयरी विकास परियोजना

एम पी स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल एवं आदिम जाति कल्याण विभाग, म.प्र. शासन के संयुक्त प्रयास एवं कृषि मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा विशेष केन्द्रीय सहायता तथा संविधान के अनुच्छेद 275 ;1द्ध मदों के तहत स्वीकृत वित्तीय सहायता से प्रदेश में 11 एकीकृत आदिवासी डेयरी विकास परियोजनाओं (त्रिवर्षीय) का क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना की कुल लागत लगभग रू. 74.80 करोड है। हितग्राहियों को परियोजनान्तर्गत 7,338 पषु षेड एवं पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराते हुए 21,642 दुधारू पशुओं का प्रदाय किया गया हैं । इसीप्रकार 66 स्वचलित दुग्ध संकलन प्रणाली की स्थापना की जाकर 15,268 हितग्राहियों को पषुप्रबंधन प्रषिक्षण उपलब्ध कराया गया है ।

3.10.2 म.प्र. वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट

  1. म.प्र. वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट मूलरुप से जल संसाधन विभाग की परियोजना है। जो वल्र्ड बैंक ऋण सहायता से प्रदेश में क्रियान्वयन की जा रही है। परियोजना अवधि 6 वर्ष ;2005-2011द्ध लागत रुपये 1919 करोड़ है। परियोजना का मूल उद्देश्य जल का समुचित उपयोग कर उत्पादकता में वृद्धि करना है।
  2. 2. पशुपालन सेक्टर को कृषि विभिन्नता की गतिविधियों के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है। पशुपालन सेक्टर का मुख्य उद्देश्य स्वस्थ पशुधन एंव उत्पादकता में वृद्धि करना एंव रोजगार के अवसर सुलभ कराना है। राज्य स्तरीय परियोजना क्रियान्वयन योजना प्रतिवेदन च्पच के घटक ‘स’ कृषि विभिन्नता कि तहत् पशुपालन सेक्टर हेतु राशि रुपये 37.00 करोड़ प्रावधानित की गई है। जिसमें वर्ष 2006-07 में विभाग को रुपये 101.06 लाख का प्रावधान किया गया जिसमें से 52.00 लाख रुपये व्यय हुए। वर्ष 2007-08 में रुपये 249.93 लाख का प्रावधान किया गया जिसमें से कुल 102.36 लाख रु. विभिन्न गतिविधियों के तहत् व्यय किया गया। वित्तीय वर्ष 2008-09 में रु0 333.62 लाख का प्रावधान इस योजना के तहत् किया गया, जिसमें से कुल 64.22 लाख रुपये विभिन्न गतिविधियों के तहत् व्यय किये गये।विभाग द्वारा परियोजना के लिए रिवाइज प्लान विश्व बैंक को अनुमोदन हेतु भेजा गया था।
  3. राज्य स्तर पर परियोजना का नोडल विभाग जल संसाधन एंव नोडल आफीसर ;परियोजना स्र्रंचालक पाइकू द्धमुख्य अभियन्ता वाह्य वित्त पोषित परियोजनाएं, जल संसाधन विभाग है।
  4. 4. पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी को जिला स्तर पर सीधे कार्यपालन यंत्री से व राज्य स्तर पर पशुधन प्रकोष्ट से समन्वय कराना है। जिला स्तर पर संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री को परियोजना क्षेत्र में पशुधन विकास से संबंधित समस्त गतिविधियों के क्रियान्वयन की जबाबदारी सौंपी गई है।
  5. 5. म0प्र0 वाटर रीटस्ट्रक्चरिंग परियोजना के अन्तर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2009-10 में विभाग द्वारा प्रेषित नवीन गतिविधियों के तहत परियोजना के अन्तर्गत आने वाले 26 जिले यथा भोपाल,रायसेन,राजगढ़,सीहोर विदिशा,कटनी,रींवा,सतना,ग्वालियर,मुरैना,दतिया,गुना,अशोकनगर,श्योपुर,शिवपुरी, सागर,दमोह,पन्ना,टीकमगढ़,छतरपुर,उज्जैन,देवास,शाजापुर,मंदसौर,नीमच,एंवधार हेतु राशि रुपये 220.76 लाख का बजट उपलब्ध कराया गया है। विभाग द्वारा माह नवम्बर 2009 तक विभिन्न गतिविधियों तथा जलाशय क्षेत्र के ग्रामों में बांझ निवारण शिविर,पशु चिकित्सा शिविर,जल उपभोक्ता समितियों के सदस्यों/पशुपालकों को प्रशिक्षण, जल उपभोक्ता समिति के सदस्यों को अनुदान पर गौवंशीय सांड/भैंसवंशीय पांड़ा प्रदाय,नर बकरों का प्रदाय,चारा भूखण्ड प्रदर्शन,क्रांप बार्डर प्लांटेशन,सूखेचारे/भूसे का यूरिया उपचार प्रदर्शन,फार्मिंग सिस्टम रिसर्च एंव डिमांस्ट्रेशन आदि गतिविधियों पर कुल राशि रुपये 143.33 लाख का व्यय किया जा चुका है।

3.10.3 दुधारू पषु बीमा योजना उद्देष्य -

पषु पालकों के दुधारू पषुओं के आकस्मिक मृत्यु आपदा विपदा से होने वाली क्षति से पषु पालकों को राहत,दुधारू पषुओं को पालने की प्रेरणा,दुग्ध उत्पादन में बढोत्तरी।

स्वरूप -

  • योजना समाज के सभी वर्गों के लिए है
  • योजनांतर्गत अधिकतम एक कृषक/पषुपालक को दो दुधारू पषुओं के बीमा का लाभ प्राप्त होगा।
  • योजनांतर्गत 50 प्रतिषत केन्द्र शासन, 25 प्रतिषत राज्य शासन से अनुदान एवं 25 प्रतिषत हितग्राही अंषदान होगा।
  • योजनांतर्गत देषी नस्ल व संकर नस्ल की गाय, भैंस, गाभिन एवं सूखी गाय सम्मिलित है।
  • योजना के लिए -रींवा,इन्दौर,सीहोर,सींधी,देवास,बालाघाट,विदिशा,रतलाम,शाजापुर धार,भिंड,मुरैना,गुना,सतना,पन्ना,सागर,शिवपुरी,छतरपुर,छिंदवाड़ा,एंव रायसेन।
3.11 विभागीय नियुक्तियाॅं एंव पदोन्नतियाॅं

तालिका 3.1

2009-10 में माह दिसम्बर तक विभागीय नियुक्ति एंव पदोन्नतियां

क्रमंाक पद श्रेणी नियुक्तियाॅं नियुक्तियाॅं
1 प्रथम श्रेणी निरंक 22
2 द्वितीय श्रेणी निरंक 21
3 तृतीय श्रेणी निरंक 5

3.12 विभागीय जाॅंच

मध्य प्रदेश शासन पशुपालन विभाग भोपाल राजपत्रित श्रेणी प्रथम एंव द्वितीय के लिए नियुक्तिकर्ता अधिकारी है। अतः इन श्रेणियों के अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जाॅंच संस्थित करने एंव निर्णय लेने का अधिकार नियोक्ता अधिकारी को ही है।

तालिका 3.2

विभागीय जाॅंच सम्बन्धी जानकारी माह दिसम्बर 2009 की स्थिति

कं0 श्रेणी जाॅंच प्रकरणों की संख्या जाॅंच प्रकरणों की संख्या लंबित जाॅंच प्रकरण
1 प्रथम श्रेणी 8 2 6
2 द्वितीय श्रेणी 14 2 12
3 तृतीय श्रेणी 8 4 4
4 चतुर्थ श्रेणी 1 1 -

3.13 न्यायालयीन प्रकरणों की स्थिति

तालिका 3.3

वर्ष 2009-10 में विभाग के विरुद्ध दायर न्यायालयीन प्रकरणों की माह दिसम्बर तक की स्थितिः-

क्र0 पद श्रेणी माननीय न्यायालय द्वारा निर्णित/खारिज निराकृत पालन हेतु शेष माननीय न्यायालय मंे कुल विचाराधीन प्रकरण
1 प्रथम श्रेणी 02 01 - 01
2 द्वितीयश्रेणी 08 06 03 21
3 तृतीय श्रेणी 12 06 06 06
4 चतुर्थ श्रेणी 39 42 14 07
योग 61 55 23 35

3.14 स्थानान्तरण

तालिका 3.4

वर्ष 2009-10 में माह दिसम्बर तक विभाग द्वारा किये गये स्थानांतरणों की जानकारी

क्रमांक श्रेणी/ पदनाम स्थानांतरण की संख्या संशोधन संख्या निरस्त की संख्या
(प्रथम श्रेणी)
1 संयुक्त संचालक 1 - -
2 उप संचालक 4 - -
(द्वितीय श्रेणी)
1 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ 12 - -
2 सहायक संचालक सांख्यकीय 2 - -
तृतीय श्रेणी
1 सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधि. 5 - -
2 लिपिक वर्गीय 1 - -
3 अलिपिक वर्गीय 1 - -

अध्याय-चार

बजट

4.1 आयोजनेत्तर बजट एंव व्यय

4.1.1 वर्ष 2009-2010 में आयोजनेत्तर मद में त्रिस्तरीय पंचायतीराज्य संस्थाओं की वित्तीय सहायता राशि को मिलाकर रुपये 23019.56 लाख का स्वीकृत प्रावधान था। विभाग द्वारा माह दिसम्बर तक रुपये 17016.49 लाख का व्यय किया गया। इसके अतिरिक्त भारित मद में 3.15 लाख का प्रावधान है जिसमें माह दिसम्बर तक रुपये 2.13 लाख व्यय हुआ।

तालिका 4.1

आयोजनेत्तर बजट एंव व्यय (राशि लाख रूपयें मेें )

वर्ष स्वीकृत प्रावधान व्यय (संख्या लाख रूपयें मेें )
2007-2008 20142.60 15837.87
2008-2009 22821.06 19290.84
2009-2010 23019.56 (दिसम्बर तक) 17016.49

तालिका 4.2

मंाग संख्या 14-2403 पशुपालन आयोजनेत्तर

बजट एंव व्यय की जानकारी वर्ष 2009-2010 बजट शीर्ष राशि लाख रुपयों में (माह दिसम्बर तक)
प्रावधान व्यय
053रख रखाव तथा मरम्मत 0.50 0.25
001 निर्देशन एंव प्रशासन 1346.07 1173.06
101 प0 चि0 सें0 एंव पशुस्वास्थ्य 12732.31 9829.83
102 पशु एंव भैंस विकास 6066.60 4624.72
103 कुक्कुट विकास 725.46 485.37
104 भेंड़ एंव ऊन विकास 308.26 184.80
109 विस्तार एंव प्रशिक्षण 810.19 107.47
113प्रशासनिकअन्वेषण एंव सांख्यिकीय 204.04 165.51
800 अन्य व्यय 826.13 445.48
योग 2403 पशुपालन आयोजनेत्तर 23019.56 17016.49
योग2403 पशुपालन डिक्रीधन (भारित) 3.15 2.13

4.2 आयोजना बजट एंव व्यय

4.2.1 2009-2010 में सामान्य आयोजनान्तर्गत मंाग संख्या 14-2403 पशुपालन आयोजना मद में रुपये 5841.35 लाख का स्वीकृत प्रावधान था जिसके विरुद्ध माह दिसम्बर तक रुपये 1676.38 लाख का व्यय हुआ । मंाग संख्या 80-2403 पशुपालन त्रिस्तरीय पंचायती राज्य संस्थाओं की वित्तीय सहायता (आयोजना) के अन्तर्गत रुपये 329.10 लाख प्रावधान के विरुद्ध माह दिसम्बर तक रुपये 149.69 लाख का व्यय हुआ ।

तालिका 4.3

आयोजना बजट एंव व्यय ( राशि लाख रूपयें मेें )

वर्ष स्वीकृत प्रावधान व्यय
2007-2008 7395.75 3806.55
2008-2009 5216.57 3901.81
2009-2010 5841.35 (माह दिसम्बर तक)1676.38

4.2.2 आदिवासी क्षेत्र उपयोजना

4.2.2.1 इस योजनान्तर्गत मंाग संख्या 41-2403 पशुपालन आदिवासी क्षेत्र उपयोजनान्तर्गत वर्ष 2009 -2010 हेतु रुपये 1520.68 लाख प्रावधान के विरुद्ध माह दिसम्बर तक रुपये 430.54 लाख व्यय हुआ ।

4.2.3 हरिजन विशेषांश (विशेष घटक ) योजना

4.2.3.1 हरिजन विशेषांश घटक योजनान्तर्गत मंाग संख्या 64-2403 पशुपालन अनुसूचित जातियों के लिए विशेष घटक योजनान्तर्गत एवं भारत सरकार की (अलावा) राशियाॅं वर्ष 2009-2010 में रुपये 880.05 लाख स्वीकृत प्रावधान के विरुद्ध माह दिसम्बर तक रुपये 698.34 लाख का व्यय हुआ ।

तालिका 4.4

मंाग संख्या 80-2403 पशुपालन आयोजनेत्तर त्रिस्तरीय पंचायती राज्य संस्थाओं को वित्तीय सहायता 14-आर्थिक सहायता/ सहायक अनुदान के अन्तर्गत बजट एंव व्यय 2009-2010 (माह दिसम्बर तक)

बजट शीर्ष राशि लाख रुपयों में
प्रावधान व्यय
2549पशुचिकित्सालय/पशु औषधालय 171.25 66.09
1108 गहन पशु विकास परियोजना 190.00 62.75
योग 361.25 128.84

तालिका 4.5

मंाग संख्या14-2403 पशुपालन आयोजना बजट एंव व्यय वर्ष 2009-10

बजट शीर्ष ( राशि लाख रुपयों में)
प्रावधान व्यय (माह दिसम्बर तक)
001 निर्देशन एंव प्रशासन 994.93 648.36
101 प0 चि0 सेवायें एंव पशु स्वास्थ्य 358.50 18.29
102 पशु एंव भैंस विकास 1288.16 536.50
103 मुर्गी पालन विकास 65.00 0
107 चारा तथा चारागाह विकास 200.00 0
109 विस्तार एंव प्रशिक्षण 135.00 121.30
800 अन्य व्यय 2049.01 110.00
महायोग 2403 पशुपालन आयोजना 5841.35 1676.38

तालिका 4.6

मंाग संख्या 80-2403 पशुपालन आयोजना त्रिस्तरीय पंचायती राज्य संस्थाओं को वित्तीय सहायता 14 आर्थिक सहायता /सहायक अनुदान के अन्तर्गत बजट एंव व्यय

वर्ष 2009-2010

बजट शीर्ष ( राशि लाख रुपयों में)
प्रावधान व्यय(दिसम्बर तक)
2549 पशु चिकित्सालय/पशु औष0 68.00 0
4082 विशेष पशुपालन कार्यक्रम 73.78 40.89
5260 साॅडों के क्रय हेतु अनुदान 107.34 57.23
5628 दुग्ध उत्पादन हेतु प्रोत्साहन योजना 59.98 51.57
कुल योग 329.10 149.69

तालिका 4.7

मंाग संख्या 52-2403 पशुपालन आदिवासी क्षेत्र उपयोजना अन्तर्गत बजट एंव व्यय वर्ष 2009-2010

बजट शीर्ष राशि लाख रुपयों में
प्रावधान व्यय (माह दिसम्बर तक)
0102-आदिवासी क्षेत्र उपयोजना 001निर्देशन एवं प्रशासन 2563-प.चि./प.औ. की स्थापना 14 आर्थिक सहायता/सहा. अनुदान 31.00 5.40
महायोग 31.00 5.40

तालिका 4.8

मंाग संख्या 41-2403 आदिवासी क्षेत्र उपयोजना अन्तर्गत बजट एंव व्यय वर्ष 2009-2010
बजट शीर्ष राशि लाख रुपयों में
प्रावधान व्यय(माह दिसम्बर तक)
001 निर्देशन एंव प्रशासन 698.49 315.22
102 साॅंड़ों के क्रय हेतु अनुदान 82.91 34.55
103 कुक्कुट विकास 43.39 8.56
105 सूकर विकास 13.56 4.48
106 अन्य पशु विकास 127.84 67.73
109 विस्तार तथा प्रशिक्षण 33.25 0
101 पशु सेवा एंव पशु स्वास्थ्य 20.00 0
800 अन्य व्यय 501.24 0
कुलयोग 1520.68 430.54

तालिका 4.9

मंाग संख्या 64-2403 पशुपालन अनुसूचित जातियों के लिए विशेष घटक योजना एवं भारत सरकार की (अलावा) राशियाॅं संबंधी बजट एंव व्यय वर्ष 2009-2010

लघुशीर्ष योजना शीर्ष ( राशि लाख रुपयों में)
प्रावधान व्यय (माह दिसम्बर तक)
001 निर्देशन एवं प्रशासन 1.00 0
102 1109 पशु एवं भैंस विकास 757.13 659.01
103 844 कुक्कुट विकास 31.28 0
105 4016 सूकर विकास 31.43 19.99
106 अन्य पशु विकास 66.96 19.34
109 विस्तार तथा प्रशिक्षण 0.25 0
कुलयोग 888.05 698.34

4.3 आयोजना

4.3.1 वर्ष 2009-10 में विभाग को राज्य आयोजनान्तर्गत वित्त विभाग द्वारा रुपये 7400.00 लाख उपलब्ध कराये गये हैं। जिसमें सामान्य योजना हेतु रुपये 4960.69 लाख, आदिवासी उपयोजना हेतु रुपये 1551.68 लाख एंव विशेष घटक योजना के लिए रुपये 888.05 लाख सम्मिलित हैं। उक्त प्रावधान के विरुद्ध वर्ष 2009-2010 में माह दिसम्बर तक सामान्य योजना में कुल रुपये 1499.12 लाख, आदिवासी उपयोजना में रुपये 409.20 लाख तथा विशेष घटक योजना में रुपये 638.21 लाख का व्यय हुआ।

तालिका 4.10

विभाग अन्तर्गत विगत तीन वर्षों में बजट प्रावधान एंव व्यय ( राशि लाख रुपयों में )

क्र0 योजना का नाम 2007-08 2008-09 2009-10
प्रावधान व्यय प्रावधान व्यय प्रावधान व्यय(दिस0तक)
1 सामान्ययोजना 3339.98 2918.49 3621.47 2856.53 4960.69 1499.12
2 आदिवासी उपयोजना 2165.15 695.98 982.10 795.24 1551.68 409.20
3 विशेष घटक योजना 870.00 717.95 1037.74 939.75 888.05 638.21

तालिका 4.11

विगत तीन वर्षों में व्यक्तिमूलक कार्यक्रमों के अन्तर्गत लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या

वर्ष आदिवासी उपयोजना विशेष घटक योजना सामान्य योजना
2007-08 3676 18499 5800
2008-09 8319 10769 6597
2009-10(दिस0तक) 2720 2570 3468

अध्याय-पाॅंच

उपलब्धि

5.1 विभिन्न योजनान्तर्गत वर्षवार प्रगति

तालिका 5.1

उपचार, टीकाकरण, नमूनों की जाॅच एंव टीका द्रव उत्पादन एंव वितरण संबंधी जानकारी (लाख में)

कं0 विवरण 2007-2008 2008-2009 2009-2010 (दिसम्बर तक)
1 पशु उपचार 41.85 40.53 29.96
2 औषधि वितरण 26.99 25.49 20.17
3 टीकाकरण 101.52 104.73 80.39
4 टीकाद्रवउत्पादन 98.44 166.99 135.35

तालिका 5.2

उन्नत प्रजनन हेतु विगत तीन वर्षों में किये गये कार्य का विवरण (लाख में)

क्रं0 विवरण 2007-2008 2008-2009 2009-2010 (दिसम्बर तक)
1 कृत्रिम गर्भाधान 7.48 7.82 7.54
2 कृत्रिम गर्भाधान से वत्सो0 2.08 2.18 2.18
3 प्राकृतिक गर्भाधान 0.68 1.63 1.13
4 प्राकृ0गर्भा0से वत्सोत्पादन 0.33 0.60 0.49
5 बधियाकरण 3.37 3.14 2.99

तालिका 5.3

मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एंव कुक्कुट विकास निगम द्वारा क्रियान्वित प्रमुख योजनाओं की वर्ष 2009-10 (दिसम्बर तक) की उपलब्धि

विवरण लक्ष्य उपलब्धि
भौतिक वित्तीय (रू.लाख) भौतिक वित्तीय (रू.लाख)
1 शासन द्वारा प्रायोजित योजनांतर्गत पषु प्रदाय (संख्या) 20,000 3,200 12,506 2,663.49
2 पषु नस्ल सुधार (नर प्रदाय) 600 96.00 406 66.99
3 पषु नस्ल सुधार (नर प्रदाय)
गौ-वंष 1,427 160.00 838 104.75
भैंस-वंष 1,256 190.35 1,050 189.00
बकरा 6,292 201.96 3,900 149.72
सूकर 1,504 31.43 1,300 37.05
सूकर त्रयी 237 13.56 1,454 113.28
4 खाद्य विक्रय (कुक्कुट, गाय, बकरी एवं सूकर) - 200.00 86.05
5 फ्रोजन सीमन का विक्रय - 200.00 - 181.31
6 अन्य बोन-वेस-मीट-मील एवं NPCBB - ;430.00 - 104.67
7 टर्न ओव्हर 4,883.30 3096.31

तालिका 5.4

पशु बीमा वर्ष 2009-10 (दिसम्बर तक) की उपलब्धि

जिला पषु योग
गाय भैंस
बालाघाट 290 884 1174
इन्दौर 1058 648 1706
देवास 131 643 774
रीवा 997 1105 2102
सीधी 190 230 420
सीहोर 282 1192 1474
योग 2948 4702 7650

तालिका 5.5

सहकारी डेयरी विकास कार्यक्रम की भौतिक एंव वित्तीय उपलब्धि

क्र. विवरण 2007-08 2008-09 2009-10दिस0तकद्ध
1 गठित प्राथमिक दुग्ध सहकारी समिति संख्या 5,507 5,511 5,570
2 कार्यशील दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 3,545 3,610 3,752
3 गठित दुग्ध सहकारी समितियों से संबंद्ध दुग्ध उत्पादकों की संख्या 2,55,589 2,54,795 2,56,060
4 दुग्ध संकलन कि.ग्रा./प्रतिदिन 4,51,712 5,15,989 4,90,747
5 कुल दुग्ध विक्रय (लीटर प्रतिदिन) 3,74,942 4,08,392 44,90,105
6 पशु आहार विक्रय (मे.टन) 64,508 71,794 58,033
7 कृत्रिम गर्भाधान (संख्या) 1,70,679 1,84,132 1,33,996
8 पशु उत्प्रेरण (संख्या) 84,355 79,525 56,548
9 विक्रय प्राप्तियां (रू. करो़ड़ में) 429.73 540.48 453.82
10 नगद लाभ/हानि ऋण अदायगी के पूर्व(रू. लाख में) 1244.47 1561.18 1,114.56

तालिका क्रमंाक 5.6

सघन डेयरी विकास कार्यक्रम की उपलब्धि

(झाबुआ,छ्रिदवाड़ा,तथा बालाघाट)

विवरण 2007-08 2008-09 2009-10 (दिस0तक)
गठित दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 348 392 378
दुग्ध उत्पादकों की संख्या 17,246 17,809 17,661
औसत दुग्ध संकलन (कि.ग्रा. प्रतिदिन) 20,493 24,652 20,275
औसत स्थानीय दुग्ध विक्रय (लीटर प्रतिदिन) 29,109 29,633 25,427

तालिका 5.7

सघन डेयरी विकास कार्यक्रम की उपलब्धि

(हरदा,बड़वानी,नीमच,श्योपुर,सिवनी)

विवरण 2007-08 2008-09 2009-10 (दिस0तक)
गठित दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 357 427 414
दुग्ध उत्पादकों की संख्या 11,299 11,314 11,318
औसत दुग्ध संकलन(कि.ग्रा. प्रतिदिन) 25,865 29,689 30,428
औसत स्थानीय दुग्ध विक्रय(लीटर /दिन) 25,402 29,449 33,040

तालिका 5.8

प्रदेश स्तर पर गौशालाओं की स्थिति

क्रंमाक विवरण संख्या
01 कुल पंजीकृत गौशालाएं 531
02 गौशाला विहिन विकास खंड 64
03 मिल्क रूट पर पड़ने वाली गौशालाओं की संख्या 237
04 गौशालाओं में स्थापित बायोगैस संयंत्र 26
05 गोकुल ग्रामों में संचालित गौशालाएं 22
05 गौशालाओ की संख्या जहां गोमूत्र से औषधियां तैयार की जा रही है 31
07 गौशालाओ की संख्या जहां गोमूत्र से फसल रक्षक बनाये जा रही है 15
08 गौशालाओ की संख्या जहां दुग्ध उत्पादन किया जा रहा है 25
09 गौशालाओ की संख्या जहां फलदार पौधे लगाये गये है 154
10 गौशालाओ की संख्या जहां औषधीय पौधे लगाये गये है 09
11 गौशालाओ की संख्या जहां सब्जी उत्पादन किया जा रहा है 03
12 गौशालाओ की संख्या जहां पुष्प उत्पादन किया जा रहा है 03
13 गौशालाओं में उपलब्ध गोवंश 76650

तालिका 5.9

गौशालाओं को वर्षवार दी गई आर्थिक सहायता का विवरण

सं.क्रं. वर्ष प्राप्त वंटन (लाख में) गौशाजाएं जिनको आर्थिक सहायता दी गई व्यय राशि (लाख में) रिमार्क
13 2007-08 15,00 मंडी बोर्ड द्वारा प्रदत्त 480
122
7,50 4,50 आर्थिक सहायता हेतु निर्माण कार्य हेतु
14 2008-09 6,00 - - मंडी बोर्ड से गौसर्वधन बोर्ड को प्राप्त।
15 2009-10 (दिस0तक) 800 00 00 मंडी बोर्ड से गौसर्वधन बोर्ड को प्राप्त।

तालिका 5.10

वर्ष 2009-10 (माह दिसम्बर तक) में पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों की लक्ष्य-पूर्ति

क्रं विवरण आमानाला आगर भदभदा गढ़ी
लक्ष्य प्राप्ति लक्ष्य प्राप्ति लक्ष्य प्राप्ति लक्ष्य प्राप्ति
1 कुल पशुधन 100 14 385 434 250 231 200 234
2 कुल उत्पादक पशु 30 12 145 154 110 84 95 88
3 गायें दूध में - - 100 73 - 51 65 31
4 गाय/भैंस शुष्क - - 35 81 - 33 16 57
5 कुल दुग्धोत्पादन लाख लीटर में - - 1.05 0.70 1.40 0.83 0.90 0.45
6 प्रतिदिन औसत दुग्धेात्पादन लीटरमें - - 4 3.51 8 7.13 7 4
7 कलोर उत्पादन - - 45 04 40 18 35 24
8 सांड उत्पादन - - 45 26 40 11 35 15
9 वत्स उत्पादन - - 165 88 95 46 80 42
10 हरा चारा उत्पादन क्ंिवटल में 8000 2079 20,000 3852 15000 7902 15000 -
11 सूखा चारा उत्पादन 2000 88 5000 - 8000 3692 6000 -

वर्ष 2009-10 में पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों की लक्ष्य-पूर्ति

क्रं विवरण इमलीखेड़ा मिनौरा रतौना रोडिया
लक्ष्य प्राप्ति लक्ष्य प्राप्ति लक्ष्य प्राप्ति लक्ष्य प्राप्ति
1 कुल पशुधन 190 175 180 215 350 111 180 233
2 कुल उत्पादक पशु 155 84 70 50 140 130 75 127
3 गायें दूध में 85 93 62 50 100 76 50 29
4 गाय/भैंस शुष्क 30 31 25 39 40 54 25 98
5 कुल दुग्धोत्पादन लाख लीटर में 1.05 0.22 0.45 0.26 1.0 0.78 0.30 0.08
6 प्रतिदिन औसत दुग्धेात्पादन 7 3.5 4 2.16 5.0 4.75 2 30.56
7 कलोर उत्पादन 40 20 25 16 50 18 25 13
8 सांड उत्पादन 40 03 25 07 45 140 25 05
9 वत्स उत्पादन 85 10 52 13 100 56 52 13
10 हरा चारा उत्पादन क्ंिवटल में 15000 6030 12000 4860 15000 10978 15000 3027
11 सूखा चारा उत्पादन 4000 - 3000 2707 6000 1020 6000 467

तालिका 5.11

वर्ष 2009-10(दिसम्बर तक) में भेंड़ पालन प्रक्षेत्र की उपलब्धि

क्रं0 विवरण बांसाखेड़ी मिनौरा पड़ौरा
1 प्रदाय किये गये मेढ़ो की संख्या 45 177 10
2 फलाई गई मेढ़ो की संख्या 869 7431 2990
3 उत्पन्न मेमनों की संख्या 842 810 1257

तालिका 5.12

प्रदेश में बकरी नस्ल सुधार हेतु पशु प्रजनन प्रक्षेत्र कीरतपुर जिला होशंगाबाद की वर्ष 2009-10 (दिसम्बर 2009 तक) उपलब्धि

योजना उपलब्धि
उन्नत नस्ल के जमुनापारी बकरों का प्रदाय 3,900
बकरी ईकाई का प्रदाय (10 उन्नत बकरी $ 1 जमुनापारी बकरा) 573

तालिका क्रमंाक 5.13

मध्यप्रदेश में केन्द्र प्रवर्तित योजना दूध,अण्डा, एंव मंास उत्पाद् के वर्षवार अनुमानित आॅंकड़े

क्रं विवरण वर्ष
2004-05 2005-06 2006-07 2007-08 2008-09
1 दुग्धोत्पादन(000 मे.टनमें) 5506 6283 6375 6572 6855
2 अण्डा उत्पादन(लाख में ) 9023 9414 9518 9747 6715
3 मंास उत्पादन(000टनमें) 15.8 19 20 20.6 34.2

तालिका 5.14

मध्यप्रदेश में केन्द्र प्रवर्तित योजना दूध,अण्डा, एंव मंास उत्पाद् के वर्षवार अनुमानित प्रति व्यक्ति उपलब्धता

वर्ष प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दुग्ध उपलब्धता (ग्राम में) प्रति व्यक्ति वार्षिक अंडा उपलब्धता (संख्या में) प्रति व्यक्ति वार्षिक मंास उपलब्धता (ग्राम में)
2006-07 259 14 300
2007-08 264 14 301
2008-09 269 10 491

अध्याय छः

सामान्य प्रशासनिक जानकारी

तालिका 6.1

विभाग में स्वीकृत /कार्यरत एंव रिक्त पदों की संख्या 31-12-09 की स्थिति

क्रमंाक श्रेणी/पदनाम स्वीकृत कार्यरत
1 संचालक 1 1
2 संयुक्त संचालक 9 7
3 उप संचालक 65 37
4 उप संचाालक(रिसर्च) 1 -
1 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ 1322 986
2 सहायक संचालक(साॅख्यिकीय) 18 11
3 क्षेत्रीय अधिकारी (साॅंख्यिकीय) 1 1
4 सहायक पंजीयक सहकारी अधि0 4 3
5 प्रशासनिक अधिकारी 1 -
6 लेखा परीक्षा अधिकारी 1 1
7 लेखा अधिकारी विभागीय 1 1
8 जन संचार दृश्य श्रा्रव्य अधि0 1 -
9 खाघ विश्लेषक 1 1
1 सहायक साॅख्यिकीय अधिकारी 4 8
2 सहा0पशु चिकि0 क्षेत्र अधि0 5,183 4238
3 प्रगति सहायक/संगणक 110 99
4 लिपिक वर्गीय 849 849
5 अलिपिक वर्गीय 322 293
चतुर्थ श्रेणी 2,919 2,833

तालिका 6.2

डेयरी विकास (साॅख्येत्तर पद) की संख्या वर्ष 31-12-09 की स्थिति में

दुग्ध आयुक्त 1 1
उपदुग्ध आयुक्त 1 1
सहायक संचा0/ प्रबन्धक 7 7
तृतीय श्रेणी 130 130
चतुर्थ श्रेेणी 170 170

6.1 सिटीजन चार्टर

विभाग के कार्य में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिला कार्यालयों एंव जिला अन्तर्गत सभी संस्थाओं में सिटीजन चार्टर के बोर्ड तैयार कर लगाये जा चुके हैं। सिटीजन चार्टर के अनुसार समयावधि में कार्य करने की कार्यवाही की जा रही है। अध्याय-सात

अध्याय-सात

7.1 म. प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम

7.1.1 निगम की स्थापना अधिनियम 37 (1982) के अन्तर्गत 19नवम्बर 1982 को हुई।
7.1.2 निगम की अधिकृत अंशपूंजी अधिकृत रू. 200.00 लाख। वर्ष 2008-09 तक प्राप्त अंष पूंजी रू. 118.23 लाख।
7.1.3 निगम का घ्येय प्रदेश के पषुधन एवं कुक्कुट उत्पादन में वृद्धि एवं नस्ल सुधार करना।
7.1.4 निगम का उद्देश्य निगम का काम काज, पषु उत्पादन (दूध तथा दुग्ध उत्पादों को छोडकर) तथा कुक्कुट उत्पादों का संग्रहण, पालन पोषण और विपणन करना और पषु तथा कुक्कुट का संरक्षण, प्रबंध और विकास करना है जिससे कि राज्य में सुधार हो सके और उसमें वृद्वि हो सके।

7.2. एम. पी. स्टेट कोआॅपरेटिव डेयरी फेडरेशन लि.

7.2.1 संरचना

  • एमपीसीडीएफ एवं दुग्ध संघों के अंतर्गत कार्यरत त्रिस्तरीय संरचना का संचालन प्रदेश के 44 जिलों में किया जा रहा है ।

7.2.2 दुग्ध संघों का कार्यक्षेत्र

दुग्ध संघवार जिलों का वर्गीकरण निम्नानुसार है:

क्र. संघ का नाम कुल जिले सम्मिलित जिले का नाम
1 भोपाल दुग्ध संघ 10 भोपाल, सीहोर, विदिशा, राजगढ, रायसेन, गुना, होशंगाबाद, बैतूल, हरदा, अशोकनगर एवं जिला शाजापुर का कुछ क्षेत्र
2 इन्दौर दुग्ध संघ 08 इन्दौर, देवास, खरगौन, धार, बडवानी, झाबुआ, खण्डवा एवं बुरहानपुर
3 उज्जैन दुग्ध संघ 05 उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, शाजापुर एवं जिला धार का कुछ क्षेत्र
4 जबलपुर दुग्ध संघ 15 जबलपुर, सिवनी, नरसिंहपुर, रींवा, सतना, मण्डला, डिंडोरी, कटनी, छिंदवाडा, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सीधी, बालाघाट एवं दमोह
5 ग्वालियर दुग्ध संघ 06 ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, शिवपुरी, दतिया, श्योपुर
कुल जिले 44

7.2.3 प्रदेष में एमपीसीडीएफ एवं 5 सदस्य दुग्ध संघों की प्रमुख गतिविधियों की भोैतिक एवं वित्तीय उपलब्धियां:

  1. सहकारी डेयरी विकास कार्यक्रम

प्रदेश में एम.पी. स्टेट कोआॅपरेटिव डेयरी फेडरेशन लि. (एम.पी.सी.डी.एफ.) ‘‘आनन्द‘‘ पद्धति पर आधारित त्रिस्तरीय संरचना के प्रथम स्तर पर है । द्वितीय स्तर पर पाॅच क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध संघ है जो कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं जबलपुर हैं। तीसरे स्तर पर ग्राम स्तर की 5,570 प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियाॅ हैं जिनके 2.55 लाख ग्रामीण दुग्ध उत्पादक कृषक सदस्य हैं।

7.2.4 राष्ट्रीय महिला कोष योजना अंतर्गत पशु संवर्धन

वर्ष 2007-08 में राष्ट्रीय महिला कोष द्वारा दिनांक 22.02.08 को महिला स्व सहायता समूह द्वारा पशु उत्पे्ररण गतिविधियों हेतु थ्त्।छब्भ्प्ैम्म् ैब्भ्म्डम् के तहत रू. पाॅंच करोड का ऋण एमपीसीडीएफ को स्वीकृत किया गया । राष्ट्रीय महिला कोष से दुधारू उत्पे्ररण हेतु रू. 5.00 करोड़ रूपये का स्वीकृत ऋण प्राप्त हआ । इस राशि को सदस्य दुग्ध संघों को पशु उत्प्रेरण कार्यक्रम हेतु उपलव्ध कराया गया।

7.2.6 महिला सहकारी समितियों का गठन

दुग्ध संघों द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में महिला दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है। इन समितियों में केवल महिलाओं को ही सदस्यता प्रदान की जाती है तथा समिति संबंधी समस्त कार्य महिलाओं द्वारा ही संपादित किये जाते हैं। वर्ष 2009-10 के दोरान माह नवंबर 2009 तक दुग्ध संघों द्वारा कुल 445 महिला दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया था जिनके 15519 सदस्य थे । इनके माध्यम से लगभग 40,000 किलोग्राम प्रतिदिन दूध का संकलन किया जा रहा है।

7.3मध्य प्रदेश गौपालन एंव पशुधन संवर्धन बोर्ड

7.3.1 बोर्ड की संरचना

मध्यप्रदेश शासन पशुपालन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश गौपालन एंव पशुधन संवर्धन बोर्ड को दिंनाक 08-10-2004 से राज्य में प्रभावशील घोषित किया गया है। बोर्ड के कृत्यो के संचालन हेतु राज्य स्तर पर एक कार्यपरिषद तथा जिला स्तर पर जिला गौपालन एंव पशुधन संवर्धन समितियों का गठन किया गया है।

7.3.2 राज्य गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड

राज्य गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड का अध्यक्ष मुख्यमंत्री,मध्यप्रदेशशासन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष मंत्री पशुपालन, सदस्य कृषि उत्पादन आयुक्त,प्रमुख सचिव गृह,प्रमुख सचिव वन, प्रमुख सचिव ग्रामीण विकास, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विकास, प्रमुख सचिव पशुपालन,संचालक पशु चिकित्सा सेवायें,प्रबन्ध संचालक उर्जा विकास निगम,संचालक कृषि,प्रबन्ध संचालक मध्यप्रदेश गौपालन एंव पशुधन संवर्धन बोर्ड,प्रबन्ध संचालक राज्य कृषि विपणन बोर्ड हैं।

(1) राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य:-

  • (अ) राज्य शासन द्वारा नामांकित एक अशासकीय व्यक्ति जो बोर्ड का ’’दूसरा’’ उपाध्यक्ष होगा.
  • (ब) गौपालन एवं पशुधन संवर्धन में रूचि रखने वाले 7 अशासकीय सदस्य जिसमें कम से कम दो पंजीकृत गौशाला के संचालक होना अनिवार्य है।
  • (स) संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, मध्यप्रदेश, गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड का सदस्य होगा।

7.3.3 जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति:-

जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति, अध्यक्ष और निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्- कलेक्टर अध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक सदस्य,उपसंचालक,पशु चिकित्सा सेवाएं पदेन सचिव, उप संचालक, कृषि सदस्य, प्रबंधक, मध्यप्रदेश उर्जा विकास निगम सदस्य, आयुक्त, नगर निगम/मुख्य नगर पालिका अधिकारी सदस्य, जिला पंचायत के कृषि समिति का अध्यक्ष सदस्य, सचिव, कृषि उपज मंडी (जिला मुख्यालय का) सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सदस्य है

(2) अशासकीय सदस्य:-

  • (अ) चार अशासकीय सदस्य, जिसमें से दो का नामांकन राज्य गौपालन एवम् पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा एवम् दो का नामांकन जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा किया जावेगा। इसके अतिरिक्त जिले के विधायकों में से एक विधायक प्रभारी मंत्री द्वारा मनोनीत किया जायेगा। जिले के विधायकों का कार्यकाल बारी-बारी से एक वर्ष का होगा।
  • (ब) अशासकीय सदस्यों में से एक सदस्य उपाध्यक्ष होगा, जिसका मनोनयन राज्य बोर्ड द्वारा किया जायेगा ।

परिशिष्ट-एक

परिशिष्ट-द¨

जिलेवार अनुमानित दूध,अण्डा, एंव मंास उत्पादन की वर्ष 2008-09 की जानकारी

क्रं0 जिले का नाम दूध (000 मे.टन में) अण्डा (लाख में) मंास (000 टन में)
1 जबलपुर 223.0 1980.1 6.0
2 कटनी
3 बालाघाट 84.9 97.0 0.4
4 छिंदवाड़ा 120.0 227.3 0.8
5 सिवनी 85.2 60.3 0.2
6 मंडला 73.1 91.0 0.2
7 डिडोरी
8 नरसिंहपुर 89.0 7.8 0.1
9 सागर 195.0 123.4 0.5
10 दमोह 112.3 36.8 0.1
11 पन्ना 111.9 12.8 0.2
12 टीकमगढ़ 179.5 37.7 0.2
13 छतरपुर 172.1 24.0 0.2
14 रींवा 218.1 14.6 0.1
15 सींधी 200.6 116.4 0.4
16 सतना 193.4 23.2 0.2
17 शहडोल 143.7 81.1 0.2
18 अनुपपुर
19 उमरिया
20 इन्दौर 246.9 615.9 4.1
21 धार 188.8 185.2 0.6
22 झाबुआ 114.6 285.9 0.7
23 खरगौन 234.7 330.8 0.8
24 बड़वानी
25 खंडवा 109.1 51.1 0.8
26 बुरहानपुर
27 उज्जैन 305.8 36.7 0.6
28 मंदसौर 287.4 24.6 0.3
29 नीमच
30 रतलाम 151.0 38.3 0.6
31 देवास 228.0 58.7 2.3
32 शाजापुर 206.7 224.3 0.9
33 ग्वालियर 221.6 37.3 0.3
34 मुरैना 490.3 18.2 0.3
35 श्योपुर
36 भिण्ड 223.6 5.6 0.2
37 शिवपुरी 259.3 36.5 0.3
38 गुना 211.0 29.8 0.3
39 अशोकनगर
40 दतिया 117.2 5.5 0.2
41 भोपाल 116.0 1373.8 6.4
42 होर 185.3 38.8 0.9
43 रायसेन 123.7 48.2 0.5
44 विदिशा 165.0 15.6 1.3
45 बैतूल 116.2 92.9 0.5
46 राजगढ़ 185.9 185.9 1.2
47 होशंगाबाद 165.1 40.4 0.2
48 हरदा
योग 6854.8 6714.8 34.2

परिशिष्ट तीन

प्रजनन योग्य गौ-भैंस की जानकारी
18वीं पशु संगणना (क्विक) के अनुसार प्रजनन योग्य गायों-भैंसों की जानकारी
गौवंश कुल प्रजनन योग्य गौ-भैंस
क्रं0 जिला संकर गाय देशी गाय योग भैंस वंश
1 अनुपपुर 859 71313 71313 17090 89262
2 अशोकनगर 821 119628 120449 61789 182238
3 बुरहानपुर 1024 33382 34406 19744 54150
4 बड़वानी 466 113841 114307 69144 183451
5 बालाघाट 1617 156187 157804 60400 218204
6 बैतूल 11169 144032 155201 87558 242759
7 भिण्ड 3164 67363 70527 166179 236706
8 भोपाल 11425 56185 67610 67060 134670
9 विदिशा 1370 180077 181447 89104 270551
10 छतरपुर 577 206393 206970 182325 389295
11 छिंदवाड़ा 7893 221269 229162 90595 319757
12 दमोह 447 232936 233383 67163 300546
13 दतिया 307 54632 54939 103500 158439
14 देवास 10268 120338 130606 138821 269427
15 धार 7951 164890 172841 129470 302311
16 डिंडोरी 24 98738 98762 24330 123092
17 गुना 1860 144399 146259 107190 253449
18 ग्वालियर 3905 10579 14484 141669 156153
19 हरदा 1491 49351 50842 41260 92102
20 होशंगाबाद 4025 127886 131911 60946 192857
21 इन्दौर 26995 63740 90735 138619 229354
22 जबलपुर 7684 149930 149930 67659 225273
23 झाबुआ 3206 170687 173893 81909 255802
24 खण्डवा 778 119250 120028 72123 192151
25 कटनी 643 168094 168737 43611 212348
26 खरगोन 1364 154247 155611 117114 272725
27 मंडला 1274 138014 139288 26923 166211
28 मंदसौर 15724 111703 127427 114210 241637
29 मुरैना 1566 67117 68683 245486 314169
30 नरसिंहपुर 5473 163719 169192 71279 240471
31 नीमच 7603 94644 102247 66430 168677
32 पन्ना 528 196161 196689 83377 280066
33 रायसेन 4846 174717 179563 72381 251944
34 राजगढ़ 2868 181601 184469 192929 377398
35 रतलाम 6923 101324 108247 88715 196962
36 रींवा 5431 343546 348977 123937 472914
37 सागर 2127 357014 359141 128568 487709
38 शहडोल 2339 129513 131852 37810 169662
39 सतना 6647 376882 383529 118753 502282
40 सीहोर 20472 125055